बरोदा उपचुनाव- क्या है बरोदा की जंग का पूरा इतिहास ?

चंडीगढ़- बरोदा उपचुनाव की घोषणा होने से पहले ही राजनितिक पार्टियों के नेता चुनावी जंग के मैदान में कूद गए है हालांकि किसी भी पार्टी ने अपने उम्मीदवार के नाम के पत्ते नहीं खोले है लेकिन हर पार्टी अपनी जीत का दावा कर रही है और इनेलो नेता अभय चौटाला ने तो यहाँ तक कह दिया कि बरोदा उप चुनाव के बाद बहुत सारे समीकरण बदल जायेगे और जो लोग आईएनएलडी को तोड़ना चाहते थे वो लोग इस चुनाव के बाद हाशिये पर आ जायेगे।
बरोदा उप-चुनाव भाजपा अध्यक्ष ओम प्रकाश धनखड़ की किसी चुनौती से कम नहीं है हालांकि वह बरोदा उप-चुनाव में जीत का दावा कर रहे है. उन्होंने कहा बरोदा उपचुनाव एक चुनौती है जिसको भाजपा अवसर में बदलेगी और जीत का परचम फ़ायरायेगी। वही हरियाणा के कृषिमंत्री जे पी दलाल ने बताया कि बरोदा विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के हारने के बाद पार्टी में भगदड़ मच जाएगी और दूसरे राज्यों की तरह हरियाणा कांग्रेस के विधायक भी पार्टी छोड़ छोड़ कर भागेंगे. 
बरोदा उपचुनाव में उम्मीदवार भाजपा का होगा या जननायक जनता पार्टी का होगा यह अभी तय नहीं हुआ लेकिन जननायक जनता पार्टी ने अभी से जनसम्पर्क अभियान छेड़ दिया है. इनसो के राष्ट्रीय अध्यक्ष दिग्विजय चौटाला ने बताया कि बरोदा विधानसभा सीट चौधरी देवी लाल की पोलिटिकल प्लेटफार्म रही है और लगातार कई बार जीती भी है.वही उन्होंने दावा किया कि भाजपा- जजपा गठबंधन एक और एक ग्यारह होकर बरोदा उपचुनाव जीतेगी।
वही इनेलो नेता अभय चौटाला ने आरोप लगाया है कि जितने भी घोटाले हुए है वो एक ही मंत्री के विभागों में हुए है. उन्होंने कहा कि बरोदा उप चुनाव के बाद बहुत सारे राजनितिक समीकरण बदल जायेगे और जो लोग आईएनएलडी को तोड़ना चाहते थे वो लोग इस चुनाव के बाद हाशिये पर आ जायेगे।

हुड्डा के लिए इज्जत का सवाल

बरोदा उप चुनाव में कांग्रेस की जीत दर्ज करवाना जहा पूर्व मुख्यमंत्री भूपिंदर सिंह हुड्डा के लिए भी इज्जत का सवाल बना हुआ है वही कांग्रेस की प्रदेश अध्यक्षा एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री कुमारी सेलजा की लिए एक बड़ी चुनौती है हालांकि 2019 विधानसभा चुनाव में यह सीट कांग्रेस जीती थी और कांग्रेस के नेता अब भी जीत का दावा कर रहे है.
अब आपको बताते है कि बरोदा विधानसभा क्षेत्र का क्या इतिहास रहा है 1967 में पहली बार बरोदा विधानसभा में चुनाव हुआ. उस समय पंडित भगवत दयाल शर्मा मुख्यमंत्री थे और उनके नजदीकी रामधारी बाल्मीकि पहली बार वहा से विधायक बने थे. इस विधानसभा क्षेत्र में 54 गाँव पड़ते है और इस हलके में लगभग 1,72,000 मतदाता है जिसमे जाट 51, एससी 23, ओबीसी 15, ब्राह्मण 11 और राजपूतों के वोट एक प्रतिशत के करीब है. बरोदा विधानसभा चुनाव में किस पार्टी का उम्मीदवार जीतेगा यह तो आने वाला समय ही बताएगा।
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